Sunday, November 4, 2012

दिल को बहलाने को कुछ अज़ाब ज़रूरी हैं...

ज़िन्दा रहने को नुस्ख़ा ये नायाब ज़रूरी है,
जज़्बातों की क़ीमत पे कुछ ख़्वाब ज़रूरी हैं।

केवल ख़ुशियों से जब काम नहीं चलता है,
दिल को बहलाने को कुछ अज़ाब ज़रूरी हैं।

जब तक तेरा नशा रहा,तो होश किसे था,
तूने रुख़ बदला जब से, मुई शराब ज़रूरी है।

जिसने तुमको दिए यहाँ पर ज़ख्म निराले,
उनको भी कुछ वाज़िब से जवाब ज़रूरी हैं।

ज़र्रे-ज़र्रे में दिखते हैं रोशन चेहरे सपनों से,
तेरे चेहरे की ख़ातिर, नज़रों में ताब ज़रूरी है।
(04 May,2012)

No comments:

Post a Comment